तुम जो गए ....शहर से
तुम जो गए ....शहर से तो ले गए
हवाओं से
खुशबुओं भरी
बातें......
वो तैरती सी
किश्तियों की
मुस्कुराती
आँखे....
और दे गए
खाली कमरों में
डोलती
बुझी बुझी सी
रोशनी......
दीवारों पर
रेंगती
अकेलेपन की
चुभन.....!
आना तो देखना
किताबें चुप
लगा कर
बैठ गयीं है
और.....
ठिठक कर
रुक गयी है
सारी कहानियाँ ...................


4 Comments:
hmmm sahi kaha aapne kabhie kabhie kisi ke jane per hi pata chalta hai ki uske bina zindagi khali kitni sooni hai
आना तो देखना
किताबें चुप
लगा कर
बैठ गयीं है
और.....
ठिठक कर
रुक गयी है
सारी कहानियाँ .......
achchhi lagi ye panktiyan khas taur par.
आना तो देखना
किताबें चुप
लगा कर
बैठ गयीं है
और.....
ठिठक कर
रुक गयी है
सारी कहानियाँ ... kitne komal se ehsaas
dhanyad manishji
rasmhji ...bahut bahut abhar
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home